भारतीय संगीत का सामान्‍य परिचय

भारतीय संगीत में गायन, वादन और नृत्य का समावेश होता है। इसे दो प्रमुख श्रेणियों, मागगी और देशी संगीत में बांटा गया है। इसमें शास्त्रीय और लोक संगीत के विविध रूप भी शामिल हैं।

भारतीय संगीत का सामान्य परिचय

भारतीय संगीत एक समृद्ध और विविधतापूर्ण कला है, जिसमें गायन, वादन एवं नृत्य सभी शामिल होते हैं। इसे आमतौर पर दो भागों में विभाजित किया गया है: मागगी और देशी संगीत। भारतीय संगीत का महत्त्व उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में भी है।

1. कलाओं का भागीकरण

कलाओं को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है: लिखित कलाएँ और अन्य उपयोगी कलाएँ। लिखित कलाओं में संगीत, काव्य, चित्रकला, मूर्तिकला, एवं स्थापत्य कला शामिल हैं। संगीत को विशेष स्थान देकर इसे कला का श्रेष्ठ रूप माना गया है।

2. संगीत की परिभाषा

संगीत एक ऐसी कला है जिसमें सवर और लय द्वारा भावों का संप्रेषण किया जाता है। इसे परिभाषित करते हुए संगीत रत्नाकर में कहा गया है, "गीत, वाद्य तथा नृत्य इन तीनों कलाओं के समावेश को संगीत कहते हैं।" यहाँ यह स्पष्ट होता है कि संगीत में विभिन्न कलाओं का समन्वय एक महत्वपूर्ण पहलू है।

3. मागगी और देशी संगीत

3.1 मागगी संगीत

मागगी संगीत वह है जिसमें शास्त्रीय नियमों का पालन कड़ी तौर पर किया जाता है। इसे अधिकतर धार्मिक एवं उत्सवों के अवसरों पर सुनाया जाता है। सांगीक रचनाएँ जैसे कि नरसंहार आदि, इस श्रेणी में आती हैं।

3.2 देशी संगीत

देशी संगीत उस प्रकार का संगीत है, जो कि जन जीवन, परंपराओं और संस्कृति से प्रभावित होता है। यह सरलता, सुंदरता और समृद्धता के साथ व्यक्त होता है। देशी संगीत की विशेषता यह है कि इसमें गायन, वादन और नृत्य कैसे जोड़ें जाते हैं। यहाँ विभिन्न स्थानों के लोक संगीत और रागों का समावेश होता है।

4. शास्त्रीय संगीत

शास्त्रीय संगीत वह संगीत है जो शास्त्रों में वर्णित नियमों और विधाओं पर आधारित है। इसके अंतर्गत उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय संगीत की विभिन्न शैलियाँ शामिल हैं। इसमें राग, ताल, एवं संगीत के विभिन्न नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है। इसके प्रकार हैं जैसे ध्रुपद, खयाल, तथा तराना।

5. उपशास्त्रीय संगीत

उपशास्त्रीय संगीत में गेय रचनाओं में संगीत के नियमों का पालन किया जाता है। इसमें शब्दों के भाव, रस और रंग का समावेश होता है। इसके अंतर्गत ठुमरी, दादरा, टप्पा या अन्य कई फॉर्म शामिल होते हैं।

6. लोक संगीत

लोक संगीत का तात्पर्य है सामान्य जन समुदाय का संगीत। यह आम व्यक्ति की भावनाओं, संस्कृति, और सामाजिक गतिविधियों का प्रचार करता है। लोक संगीत सरल और सुगम होता है, जिसमें कोई विशेष शासकीय नियम नहीं होते। यह मुख्यतः मौखिक परंपरा के माध्यम से सहेज जाता है। इसके उदाहरण हैं: गरबा, भांगड़ा, रासलीला आदि।

7. सगुम संगीत

सगुम संगीत सरलता और सहजता से गाया-Bजایا जाने वाला संगीत है। इसमें किसी विशेष नियम का पालन नहीं किया जाता। इसमें संक्षिप्त रचनाएँ और काव्य का समावेश होता है और ये विभिन्न भाषाओं में पाई जाती हैं।

8. महत्व

भारतीय संगीत न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह संस्कृति और सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग भी है। यह लोगों को जोड़ने और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम है। संगीत का प्रशिक्षण और प्रसार हमारे समाज में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखता है।

निष्कर्ष

भारतीय संगीत का अध्ययन न केवल इसे समझने में हेल्पफुल है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं उसकी विविधताओं को भी दर्शाता है। वर्तमान समय में इसे आधुनिक तकनीकों और विधाओं के माध्यम से विकसित किया जा रहा है।

Key terms/Concepts

  1. भारतीय संगीत में गायन, वादन और नृत्य सभी शामिल हैं।
  2. शास्त्रीय संगीत को मागगी और देशी संगीत में बांटा गया है।
  3. मागगी संगीत में शास्त्रीय नियमों का पालन किया जाता है।
  4. देशी संगीत आम जीवन, परंपरा एवं संस्कृति से प्रभावित होता है।
  5. शास्त्रीय संगीत में विभिन्न शैलियों जैसे ध्रुपद, खयाल आदि शामिल हैं।
  6. उपशास्त्रीय संगीत में शब्दों और भाव का समावेश होता है।
  7. लोक संगीत सामान्य जनता का संगीत होता है, जिसमें नियमों का पालन नहीं होता।
  8. सगुम संगीत सरल और सहजता से प्रस्तुत किया जाता है।
  9. भारतीय संगीत का सांस्कृतिक, सामाजिक, और ऐतिहासिक महत्त्व है।
  10. संगीत का अध्ययन सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में सहायक है.

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